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भारतीय रुपया संघर्ष कर रहा है क्योंकि एफआईआई बिक्री का दबाव जारी है

भारतीय रुपया उठने में कठिनाई का सामना कर रहा है क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस तिमाही में $X अरब के शेयर बेचे हैं, जिसके पीछे मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बांड उपज है। यह बिक्री का दबाव रुपये को डॉलर के मुकाबले कमजोर स्तरों के करीब बनाए रखता है।

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भारतीय रुपया उठने में कठिनाई का सामना कर रहा है, क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) अपनी बिक्री का सिलसिला बनाए हुए हैं। यह मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर स्तरों के करीब बनी हुई है, जिसके पीछे भारतीय बाजारों से निरंतर पूंजी निकासी का कारण है।

मुख्य बिंदु:

• इस तिमाही में एफआईआई ने $X अरब के शेयर बेचे हैं।

• कारणों में मजबूत अमेरिकी डॉलर, बढ़ते बांड उपज और मिश्रित कॉर्पोरेट कमाई शामिल हैं।

• एफआईआई की निरंतर बिक्री निकट भविष्य में रुपये को दबाव में रख सकती है।

यह निवेश सलाह नहीं है। केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए.

OI Charts is not a SEBI-registered investment adviser or research analyst. This bulletin was written by the OI Charts desk from the public sources listed here. It is commentary on market conditions, not a basis for any investment decision and not a recommendation to buy or sell any security. Prices as of 21 Jul 2026, 07:09 IST.

Sourcesnews.google.com

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