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भारतीय बैंकों को फंडिंग प्रतिस्पर्धा के बीच मार्जिन दबाव का सामना करना पड़ रहा है

भारतीय बैंकों को आरबीआई की मौद्रिक easing के कारण नेट इंटरेस्ट मार्जिन में 154 बिप्स की कमी का सामना करना पड़ रहा है। 2025 में 5% से ऊपर जमा लागत में महत्वपूर्ण वृद्धि होने से बैंकिंग सेक्टर में लाभप्रदता पर चुनौतियाँ बढ़ रही हैं।

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भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक easing के कारण भारतीय बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) में 154 बिप्स की कमी आई है, जो COVID-19 महामारी से पहले देखी गई 40 बिप्स की कमी से कहीं ज़्यादा गहरी है। यह बदलाव जमा के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है, जिससे औसत जमा लागत 2025 में 5% के ऊपर जा सकती है, जो 2024 में 4.7% थी। 📉

ट्रेडर्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि फंडिंग लागत के बढ़ने से बैंकों की लाभप्रदता पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, जो इस क्षेत्र में स्टॉक के प्रदर्शन को प्रभावित करता है।

यह निवेश सलाह नहीं है। केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए.

OI Charts is not a SEBI-registered investment adviser or research analyst. This bulletin was written by the OI Charts desk from the public sources listed here. It is commentary on market conditions, not a basis for any investment decision and not a recommendation to buy or sell any security. Prices as of 17 Feb 2026, 16:09 IST.

Sourcesnews.google.com

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